सृष्टि परिवर्तन बनाम दृष्टि परिवर्तन: पूर्ण सुख का ‘मंगलमान’ मार्ग

“सृष्टि कितनी भी बदल जाए, भौतिक साधनों से पूर्ण सुख नहीं मिल सकता। लेकिन हमारी दृष्टि का एक छोटा सा सकारात्मक परिवर्तन हमें असीम आनंद से भर सकता है। लोक-कल्याण के जीवंत आंदोलन ‘मंगलमान’ के विशेष संदर्भ में जानिए सृष्टि परिवर्तन बनाम दृष्टि परिवर्तन का यह गहरा दर्शन, जो हमें समस्या नहीं बल्कि समाधान का हिस्सा बनना सिखाता है।”

श्री राम कॉलोनी में सजा ‘स्वच्छ हरित भंडारा’

लखनऊ की सुप्रसिद्ध बड़ा मंगल परंपरा के तहत श्री राम कॉलोनी में आयोजित हुआ भव्य ‘स्वच्छ हरित भंडारा’। मंगलमान अभियान के आग्रह पर श्री राम जानकी समिति ने थर्माकोल और प्लास्टिक को पूरी तरह वर्जित कर बायोडिग्रेडेबल पत्तलों का उपयोग किया और समाज के सामने ‘ज़ीरो-वेस्ट’ आयोजन का एक प्रेरक उदाहरण पेश किया। पढ़ें पूरी प्रेस विज्ञप्ति।

सनातनी चेतना का शंखनाद

“लखनऊ के गोमती नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के संयुक्त तत्वावधान में भव्य सुंदरकांड एवं हनुमान चालीसा पाठ का आयोजन किया गया। कुंवर पुनीत सिंह के आवास पर सजे इस धार्मिक समागम में सैकड़ों सनातनी बंधुओं और वरिष्ठ सांगठनिक पदाधिकारियों ने हिस्सा लिया। शंखध्वनि और वाद्य यंत्रों की थाप पर गूंजी प्रभु की चौपाइयों की विस्तृत रिपोर्ट और तस्वीरें यहाँ देखें।”

दुबग्गा में सजा ‘तुलसी पौध भंडारा’

“लखनऊ की ऐतिहासिक ‘बड़ा मंगल’ परंपरा में आस्था और पर्यावरण चेतना का एक अद्भुत संगम! जहाँ चारों ओर पूड़ी-सब्जी के भंडारे सजे थे, वहीं दुबग्गा के प्रसिद्ध बरदानी बाबा मंदिर में ‘सुमन स्मृति सेवा संस्थान’ द्वारा एक भव्य निःशुल्क ‘माता तुलसी पौध भंडारा’ आयोजित किया गया। जानिए कैसे सैकड़ों परिवारों को तुलसी के पौधे बांटकर धरा को ‘प्राणवायु’ देने और सनातन संस्कारों को सींचने की यह अनूठी पहल संपन्न हुई। पूरी रिपोर्ट पढ़ें।”

मंगलमान जीवन का आधार

जीवन केवल सांस लेने या दिन काटने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक उत्सव है जिसे ‘उच्च विचारों’ की ऊर्जा के साथ जी भर कर जीना चाहिए। जब हम अपने विचारों को संकीर्णता से ऊपर उठाकर ‘मंगल’ (लोक-कल्याण) की ओर ले जाते हैं, तो हमारा अस्तित्व स्वयं ही सार्थक हो जाता है। उच्च विचार: मंगलमान की नींव मंगलमान का मूल मंत्र है—’सबका मंगल, सबका भला।’ उच्च विचारों का अर्थ है मन में ईर्ष्या, द्वेष और भय के स्थान पर प्रेम, करुणा और सेवा को स्थान देना। जब हम ऊँचे लक्ष्य निर्धारित करते हैं और अपनी सोच को सकारात्मक रखते Read More

आज के समय में सबसे बड़ी समस्या

आज के समय में सबसे बड़ी समस्या यह हो गई है कि इंसान जहां होता है, उसका मन वहां नहीं होता। कई बार आप किसी से बात कर रहे होते हैं, लेकिन अचानक ध्यान कहीं और चला जाता है। सामने वाला क्या बोल रहा था, वह भी याद नहीं रहता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मन वर्तमान में नहीं रहता। या तो बीते हुए कल में उलझा रहता है, या आने वाले कल की चिंता और प्लानिंग में खोया रहता है। धीरे-धीरे यही आदत इंसान को “एब्सेंट माइंडेड” बना देती है। फिर व्यक्ति कहीं घूमने जाए, लोगों से मिले, अच्छा Read More

डिस्पोजेबल के बजाय स्टील के बर्तनों का चयन क्यों?

सनातन परंपरा में दान और भंडारे का विशेष महत्व है। अक्सर हम अपनी श्रद्धा के अनुसार आयोजन तो करते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो प्रकृति और ज्योतिषीय ऊर्जा के विरुद्ध होती हैं। वर्तमान समय में प्लास्टिक और थर्माकोल का बढ़ता उपयोग हमारे पुण्य कर्मों के प्रभाव को कम कर रहा है। मंगल और स्वच्छता का गहरा नाता ​ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ‘धातु’ का स्वामी माना गया है। मंगल की शुद्ध ऊर्जा ‘स्वच्छता’ और ‘अनुशासन’ में निहित है। इसके विपरीत, गंदगी और कचरा राहु का कारक है। ​प्लास्टिक या थर्माकोल का कचरा फैलाना राहु Read More

स्वच्छ हरित बड़ा मंगल का संकल्प

मंगलमान अभियान के अंतर्गत विश्व संवाद केंद्र लखनऊ में एक बैठक का आयोजन हुआ जिसमें मंगल सेवकों ने आगामी बड़े मंगल पर स्वच्छ हरित बड़ा मंगल मनाने एवं मंगल का मान बढ़ाने का संकल्प लिया। इस बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की अखिल भारतीय पर्यावरण गतिविधि संयोजक श्री गोपाल आर्य ने कहा कि लखनऊ की परंपरा अत्यंत ही प्राचीन है एवं यह विश्व में एक अनोखी परंपरा है। उन्होंने महाकुंभ की भांति ही बड़ा मंगल के अवसर पर भी स्वच्छता और पवित्रता का नया अध्याय लिखे जाने की बात की। इसके लिए सभी सम वैचारिक संगठनों, शासन प्रशासन, एन एस Read More

स्वच्छ हरित बड़ा मंगल का नया अध्याय लिखेगा लखनऊ

मंगलमान अभियान के अंतर्गत आज विश्व संवाद केंद्र, लखनऊ में एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। इस बैठक में आगामी बड़ा मंगल पर्व को ‘स्वच्छ हरित बड़ा मंगल’ के रूप में मनाने और मंगल का मान बढ़ाने के लिए व्यापक कार्ययोजना पर चर्चा हुई। बैठक में उपस्थित मंगल सेवकों ने सामूहिक रूप से लखनऊ की इस पावन परंपरा को भव्य, दिव्य और कचरा मुक्त बनाने का संकल्प लिया।कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित अखिल भारतीय पर्यावरण गतिविधि (आर.एस.एस.) के संयोजक श्री गोपाल आर्य ने कहा कि लखनऊ की बड़ा मंगल परंपरा अत्यंत प्राचीन और विश्व में अनोखी Read More

भारत की समृद्धि का आधार: गौ-संस्कृति

“राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के गौ सेवा प्रमुख श्री नवल किशोर जी ने मंगलमान कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए भारत की प्राचीन समृद्धि और गौ-संस्कृति के महत्व पर प्रकाश डाला। जानिए कैसे ‘गौ-व्रती परिवार’ बनकर हम राष्ट्र मंगल के संकल्प को सिद्ध कर सकते हैं।”