बदलाव की नई कॉर्पोरेट मिसाल

📜 कानपुर रोड पर किआ मोटर्स (Kia Motors) के ‘शून्य-अपशिष्ट’ भंडारे ने बदला बड़े मंगल का स्वरूप

“हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो, बड़ा मंगल से राष्ट्र मंगल हो”

लखनऊ। “कौन कहता है कि आसमान में सुराख नहीं हो सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारों।” दुष्यंत कुमार जी की ये पंक्तियां छठे बड़े मंगल (9 जून 2026) पर लखनऊ के कानपुर रोड स्थित स्काईडैक किआ मोटर्स (Skydac Kia) के विशाल भंडारे पर अक्षरशः चरितार्थ होती नजर आईं।

कानपुर रोड जैसी व्यस्ततम और हर पल दौड़ती मुख्य सड़क पर, जहाँ दोपहर के समय हजारों की भीड़ प्रसाद ग्रहण करने उमड़ती है, वहाँ स्वच्छता और पर्यावरण अनुकूलता का ऐसा अनुशासित ढांचा खड़ा करना किसी चमत्कार से कम नहीं था। लेकिन किआ मोटर्स के इस भंडारे ने यह साबित कर दिया कि यदि इरादे नेक और प्रयास संगठित हों, तो सबसे कठिन लगने वाला बदलाव भी धरातल पर उतारा जा सकता है।

🤝 प्रफुल्ल राय जी की अनूठी पहल: कॉर्पोरेट के साथ जुड़ा ‘मंगलमान’

किआ मोटर्स के शोरूम और सर्विस सेंटर पर वैसे तो प्रतिवर्ष बड़े मंगल के पावन अवसर पर भंडारे का आयोजन होता रहा है। लेकिन पिछले वर्ष से मंगलमान अभियान के वरिष्ठ और कर्मठ कार्यकर्ता श्री प्रफुल्ल राय जी ने एक बेहतरीन पहल की। उन्होंने किआ मोटर्स प्रबंधन और स्टाफ के साथ मिलकर इस भंडारे को सीधे ‘मंगलमान अभियान’ के पर्यावरण-अनुकूल सिद्धांतों से जोड़ दिया।

प्रफुल्ल जी के इस वैचारिक प्रयास का ही असर है कि अब यह भंडारा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि स्वच्छता के प्रति एक बड़ी सामाजिक जागृति का माध्यम बन चुका है।

🚫 सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूर्ण विदाई और ‘ऑन-स्पॉट’ सफाई व्यवस्था

हाईवे के किनारे लगने वाले भंडारों में सबसे बड़ी चुनौती डिस्पोजेबल ग्लास और दोने-पत्तलों के कचरे की होती है। लेकिन किआ मोटर्स के भंडारे ने इन सभी कुप्रथाओं को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया:

  • प्लास्टिक पर पूर्ण प्रतिबंध: पूरे आयोजन में पानी से लेकर बूंदी, पूड़ी-सब्जी और हलवे के महाप्रसाद के वितरण तक, प्लास्टिक या थर्माकोल की एक भी सामग्री का उपयोग नहीं किया गया।
  • मुस्तैद किआ स्टाफ और डस्टबिन व्यवस्था: संलग्न वीडियो और चित्रों में स्पष्ट देखा जा सकता है कि किआ मोटर्स के उच्च पदों पर कार्यरत अधिकारी और पूरा स्टाफ स्वयं आगे बढ़कर कमान संभाले हुए था। परिसर में जगह-जगह आधुनिक ‘क्लीनो’ (Kleeno) डस्टबिन रखे गए थे।
  • क्षण भर में सफाई: जैसे ही कोई श्रद्धालु प्रसाद ग्रहण करता, स्टाफ की टोलियां तुरंत सड़क को इस तरह साफ कर देती थीं कि कोई देखकर अंदाजा भी नहीं लगा सकता था कि यहाँ हजारों लोग प्रसाद पा चुके हैं।

👁️ डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव और अजीत जी ने पहनाया ‘सम्मान का अंग वस्त्र’

कॉर्पोरेट जगत के इस अद्भुत और प्रेरणादायी अनुशासन को सराहने के लिए मंगलमान अभियान की केंद्रीय टीम से डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव जी और श्री अजीत जी विशेष रूप से किआ मोटर्स के इस पंडाल पर पहुँचे।

हाईवे पर ऐसी अनुकरणीय स्वच्छता और सुव्यवस्था को देखकर दोनों वरिष्ठ पदाधिकारी भावविभोर हो गए। उन्होंने किआ मोटर्स के जिम्मेदार अधिकारियों, प्रफुल्ल राय जी और महिला स्टाफ सहित पूरी टीम का मंगलमान का आधिकारिक अंग वस्त्र पहनाकर हार्दिक अभिनंदन और स्वागत किया। अभियान की ओर से इस पावन भगीरथ प्रयास के लिए किआ परिवार को हजारों-हजारों धन्यवाद और साधुवाद प्रेषित किया गया।

🎯 साझा भंडारा (Shared Bhandara): छूटे हुए संकल्पों को पूरा करने का मंच

श्री प्रफुल्ल राय जी इस भंडारे के माध्यम से धीरे-धीरे समाज के और भी लोगों को जोड़ने का एक बेहद अभिनव कार्य कर रहे हैं। अक्सर समाज में ऐसे अनेक लोग होते हैं जो अपने स्तर पर भंडारा लगाने की इच्छा तो रखते हैं, लेकिन समय, स्थान या संसाधनों की कमी के कारण ऐसा नहीं कर पाते।

प्रफुल्ल जी और मंगलमान का यह साझा प्रयास रहता है कि ऐसे श्रद्धालुओं को किआ मोटर्स जैसे ‘आदर्श भंडारों’ के साथ सह-आयोजक के रूप में जोड़ दिया जाए। इससे उनका संकल्प भी पूरा हो जाता है और समाज में ‘साझा सेवा’ की एक नई व मजबूत संस्कृति का विकास होता है।

स्काईडैक किआ मोटर्स का यह भंडारा शहर के उन तमाम बड़े प्रतिष्ठानों और शोरूमों के लिए एक खुली सीख है जो समाज से कमाते हैं और उत्सवों के माध्यम से समाज को कुछ वापस लौटाना चाहते हैं। आस्था जब कॉर्पोरेट अनुशासन और पर्यावरण संरक्षण से हाथ मिलाती है, तो राष्ट्र मंगल का मार्ग स्वतः ही प्रशस्त हो जाता है।

क्या आपको कॉर्पोरेट जगत का यह पर्यावरण-अनुकूल प्रयास पसंद आया? कमेंट बॉक्स में किआ मोटर्स की टीम का उत्साहवर्धन करें और इस प्रेरक लेख को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें!

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