सेवा, संस्कार और पारिवारिक मिलन

📜 आशियाना में श्री मुक्तिनाथ सिंह जी के वर्षों पुराने भंडारे ने दिया ‘अमंगल’ को मिटाने का महा-संदेश

“हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो, बड़ा मंगल से राष्ट्र मंगल हो”

लखनऊ। ज्येष्ठ मास के छठे बड़े मंगल (9 जून 2026) पर लखनऊ का आशियाना क्षेत्र एक ऐसे भंडारे का साक्षी बना, जो केवल श्रद्धालुओं की क्षुधा शांत करने का माध्यम नहीं है, बल्कि वह सेवा का पर्याय होने के साथ-साथ एक महान पारिवारिक और सामाजिक चेतना का जीवंत केंद्र भी है।

यह भंडारा आयोजित किया गया मंगलमान अभियान के वरिष्ठ कार्यकर्ता श्री मुक्तिनाथ सिंह जी, उनके परिवार और प्रिय मित्र जनों के द्वारा। वर्षों से अनवरत चले आ रहे इस भंडारे की गूंज और इसकी आत्मीयता आज पूरे आशियाना क्षेत्र में चर्चा का विषय बनी हुई है।

👨‍👩‍👧‍👦 पारिवारिक मिलन और सामाजिक समरसता का अनुपम संगम

भंडारे के पीछे की मूल भावना को साझा करते हुए श्री मुक्तिनाथ सिंह जी बड़े ही भावुक स्वर में कहते हैं कि यह आयोजन उनके लिए केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि पूरे परिवार को एक सूत्र में पिरोने का जरिया है। इस भंडारे के बहाने उनका पूरा परिवार एक साथ इकट्ठा होता है, दूर-दराज रहने वाले इष्ट-मित्र और सगे-संबंधी ‘भंडारा दर्शन’ के लिए खिंचे चले आते हैं और सब मिलकर प्रभु का प्रसाद ग्रहण करते हैं। इस प्रकार, यह आयोजन आपसी प्रेम, सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकजुटता का एक बेहद खूबसूरत और मजबूत स्तंभ बन चुका है।

🚫 “जीवन से अमंगल का नाश हो”—मुक्तिनाथ सिंह जी का प्रेरक संदेश

एक सच्चे मंगलमान सिपाही की तरह श्री मुक्तिनाथ सिंह जी ने भंडारे के माध्यम से समाज को एक बहुत ही गहरा और वैचारिक संदेश दिया है। उनका कहना है:

“मंगलमान अभियान का मूल ध्येय केवल बड़े मंगल के दिन भंडारा लगाना या सफाई करना नहीं है, बल्कि इसका मुख्य संदेश यह है कि हम अपने जीवन के हर दिन और हर पल को ‘मंगलमय’ बनाएं। हमें अपने जीवन में ऐसी किसी भी वस्तु, विचार या आदत का उपयोग नहीं करना है जो ‘अमंगल’ हो, जिससे हमारे स्वास्थ्य, हमारे परिवार या हमारे समाज को कोई नुकसान पहुँचता हो। यही संदेश हम इस भंडारे के माध्यम से हर एक श्रद्धालु तक पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं।”

इसी वैचारिक चेतना के कारण इस भंडारे में पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने वाले प्लास्टिक या थर्माकोल का उपयोग पूरी तरह वर्जित रहा और स्वच्छता व पवित्रता के उच्चतम मानकों का पालन किया गया।

👁️ मंगलमान टीम के अजीत जी और डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव ने किया ‘भंडारा दर्शन’

भंडारे की इस अनूठी पारिवारिक परंपरा और अनुकरणीय व्यवस्था को देखने के लिए मंगलमान अभियान के ‘भंडारा दर्शन’ कार्यक्रम के अंतर्गत अभियान के प्रमुख सदस्य श्री अजीत जी और डॉ. आनंद प्रकाश श्रीवास्तव जी विशेष रूप से आशियाना पहुँचे।

वहाँ के आत्मीय माहौल, बेहतरीन व्यवस्था, अनुशासन और सेवा भाव को देखकर दोनों पदाधिकारी अत्यंत प्रभावित हुए। उन्होंने श्री मुक्तिनाथ सिंह जी और उनकी पूरी मित्र-मंडली का हार्दिक अभिनंदन किया और स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मुक्तिनाथ जी का यह प्रयास समाज के लिए एक आदर्श है कि कैसे हम अपनी धार्मिक परंपराओं को सामाजिक और पारिवारिक मूल्यों के संवर्धन से जोड़ सकते हैं।

🎯 राष्ट्र मंगल की ओर बढ़ते कदम

आशियाना का यह भंडारा हमें सिखाता है कि जब समाज का हर परिवार अपने स्तर पर ‘अमंगल’ को त्याग कर ‘मंगल’ को अपनाने का संकल्प ले लेगा, तो पूरे राष्ट्र का कल्याण स्वतः ही सुनिश्चित हो जाएगा। वर्षों से समाज को प्रेरित कर रहे इस भव्य भंडारे और इसके पीछे की पावन सोच को मंगलमान परिवार सलाम करता है। श्री मुक्तिनाथ सिंह जी और उनके पूरे परिवार को इस पुनीत कार्य के लिए अनंत साधुवाद!

क्या आपके परिवार में भी उत्सवों को इस तरह मिलन का केंद्र बनाया जाता है? अपने विचार और अनुभव हमसे कमेंट बॉक्स में साझा करें और इस सकारात्मक संदेश को आगे बढ़ाने के लिए लेख को शेयर करना न भूलें!

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