जीवन केवल सांस लेने या दिन काटने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक उत्सव है जिसे ‘उच्च विचारों’ की ऊर्जा के साथ जी भर कर जीना चाहिए। जब हम अपने विचारों को संकीर्णता से ऊपर उठाकर ‘मंगल’ (लोक-कल्याण) की ओर ले जाते हैं, तो हमारा अस्तित्व स्वयं ही सार्थक हो जाता है। उच्च विचार: मंगलमान की नींव मंगलमान का मूल मंत्र है—’सबका मंगल, सबका भला।’ उच्च विचारों का अर्थ है मन में ईर्ष्या, द्वेष और भय के स्थान पर प्रेम, करुणा और सेवा को स्थान देना। जब हम ऊँचे लक्ष्य निर्धारित करते हैं और अपनी सोच को सकारात्मक रखते Read More
आज के समय में सबसे बड़ी समस्या यह हो गई है कि इंसान जहां होता है, उसका मन वहां नहीं होता। कई बार आप किसी से बात कर रहे होते हैं, लेकिन अचानक ध्यान कहीं और चला जाता है। सामने वाला क्या बोल रहा था, वह भी याद नहीं रहता। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मन वर्तमान में नहीं रहता। या तो बीते हुए कल में उलझा रहता है, या आने वाले कल की चिंता और प्लानिंग में खोया रहता है। धीरे-धीरे यही आदत इंसान को “एब्सेंट माइंडेड” बना देती है। फिर व्यक्ति कहीं घूमने जाए, लोगों से मिले, अच्छा Read More
सनातन परंपरा में दान और भंडारे का विशेष महत्व है। अक्सर हम अपनी श्रद्धा के अनुसार आयोजन तो करते हैं, लेकिन अनजाने में कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो प्रकृति और ज्योतिषीय ऊर्जा के विरुद्ध होती हैं। वर्तमान समय में प्लास्टिक और थर्माकोल का बढ़ता उपयोग हमारे पुण्य कर्मों के प्रभाव को कम कर रहा है। मंगल और स्वच्छता का गहरा नाता ज्योतिष शास्त्र में मंगल को ‘धातु’ का स्वामी माना गया है। मंगल की शुद्ध ऊर्जा ‘स्वच्छता’ और ‘अनुशासन’ में निहित है। इसके विपरीत, गंदगी और कचरा राहु का कारक है। प्लास्टिक या थर्माकोल का कचरा फैलाना राहु Read More