जी हां, यह एक गहरा और महत्वपूर्ण धारणा है। “भगवान भाव के भूखे होते हैं, वस्तु के नहीं” यह अर्थात् यह कि भगवान को हमारे मन में और हमारे भावनाओं में रूचि होती है, न कि उन्हें चीजों की आवश्यकता होती है। इसका एक उदाहरण है कथा में जो कहती है कि एक बार एक योगी ने ध्यान के दौरान भगवान से प्रार्थना की कि वह उनकी भक्ति को प्रसन्न करें और उन्हें अपने साकार रूप में दर्शन दें। भगवान ने उनकी प्रार्थना सुनी और उन्हें अपने दरबार में बुलाया। योगी ने अपनी भक्ति के साथ दरबार में प्रवेश किया, Read More
कार्यक्रम सूचनाएं
"सृष्टि कितनी भी बदल जाए, भौतिक साधनों से पूर्ण सुख नहीं मिल सकता। लेकिन हमारी दृष्टि का एक छोटा सा सकारात्मक...
लखनऊ की सुप्रसिद्ध बड़ा मंगल परंपरा के तहत श्री राम कॉलोनी में आयोजित हुआ भव्य 'स्वच्छ हरित भंडारा'। मंगलमान अभियान के...
"लखनऊ के गोमती नगर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के संयुक्त तत्वावधान में भव्य सुंदरकांड एवं...
"लखनऊ की ऐतिहासिक 'बड़ा मंगल' परंपरा में आस्था और पर्यावरण चेतना का एक अद्भुत संगम! जहाँ चारों ओर पूड़ी-सब्जी के भंडारे...
जीवन केवल सांस लेने या दिन काटने का नाम नहीं है, बल्कि यह एक उत्सव है जिसे 'उच्च विचारों' की ऊर्जा...