📜 इंदिरा नगर में अश्वंत वर्मा जी के भंडारे ने पेश की ‘मंगलमान’ की सबसे सुंदर तस्वीर
“हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो, बड़ा मंगल से राष्ट्र मंगल हो”
लखनऊ। ज्येष्ठ मास के छठे बड़े मंगल (9 जून 2026) के अवसर पर जहाँ पूरी लखनऊ नगरी भंडारों के महा-उत्सव में डूबी रही, वहीं इंदिरा नगर क्षेत्र में आयोजित एक विशेष भंडारे ने भक्ति, सेवा और सामाजिक चेतना का एक ऐसा अनूठा उदाहरण प्रस्तुत किया जो आज पूरे शहर के लिए चर्चा और प्रेरणा का विषय बना हुआ है।
यह महा-भंडारा उत्तर प्रदेश युवा उद्योग व्यापार मंडल के प्रदेश उपाध्यक्ष एवं युवा नेतृत्व श्री अश्वंत वर्मा जी के कुशल मार्गदर्शन और उनकी ऊर्जावान टीम के संयोजन में आयोजित किया गया था। इस भंडारे की सबसे बड़ी और अनूठी विशेषता यह रही कि इसने आस्था के साथ-साथ अनुशासन और मर्यादा की एक नई और ऊंची लकीर खींच दी है।
🎵 चौबीसों घंटे गूंजता रहा प्रभु का नाम: भजन-कीर्तन और भंडारे का अद्भुत संगम
आम भंडारों से इतर, अश्वंत वर्मा जी के इस पंडाल का माहौल पूरी तरह आध्यात्मिक और दिव्य था। यहाँ एक विशाल और सुसज्जित मंच पर लगातार प्रभु श्रीराम और संकटमोचन हनुमान जी के भजनों का संकीर्तन चल रहा था। एक तरफ जहाँ श्रद्धालु सुमधुर भजनों पर झूम रहे थे, वहीं दूसरी तरफ बेहद शालीनता के साथ महा-प्रसाद का वितरण चल रहा था। भक्ति संगीत और सेवा की इस जुगलबंदी ने पंडाल में आने वाले प्रत्येक नागरिक को एक अलौकिक शांति की अनुभूति कराई।
📙 सनातन संस्कृति का सम्मान: अतिथियों को शॉल और सुंदरकांड की भेंट
आयोजक मंडल ने इस अवसर पर आने वाले विशिष्ट अतिथियों, प्रबुद्ध नागरिकों और समाजसेवियों का स्वागत केवल पारंपरिक रूप से नहीं किया, बल्कि उन्हें अंग वस्त्र/शॉल ओढ़ाकर और प्रभु की महिमा से ओतप्रोत ‘सुंदरकांड’ की पवित्र प्रतियां भेंट कर सम्मानित किया। आयोजकों का मानना है कि प्रसाद से पेट की तृप्ति के साथ-साथ आत्मा की तृप्ति और सनातन मूल्यों का प्रसार भी इस महापर्व का मुख्य ध्येय होना चाहिए।
🚫 कचरे का नामोनिशान नहीं: घंटों चले भंडारे में नहीं बिखरा एक भी दोना-पत्तल!
इस भंडारे की जो बात सबसे ज्यादा अचंभित करने वाली और ‘मंगलमान’ के आदर्शों के शत-प्रतिशत अनुकूल रही, वह थी यहाँ की स्वच्छता व्यवस्था। यह क्षेत्र काफी विस्तृत था और हजारों की संख्या में लोगों की आवाजाही हो रही थी, लेकिन आयोजकों की सजगता के कारण:
- सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूर्ण ‘ना’: पूरे भंडारे में पानी पिलाने से लेकर प्रसाद देने तक, किसी भी प्रकार की प्लास्टिक या थर्माकोल की सामग्रियों का उपयोग पूरी तरह प्रतिबंधित था।
- अद्भुत कचरा प्रबंधन (Zero Littering): भंडारा कई घंटों तक लगातार चलता रहा, लेकिन परिसर या आसपास की सड़कों पर एक भी दोना, पत्तल या ग्लास बिखरा हुआ नजर नहीं आया। स्वयंसेवकों की टोलियां लगातार व्यवस्था बनाए रखने में जुटी रहीं।
👁️ प्रो. रामकुमार तिवारी जी ने किया ‘भंडारा दर्शन’ और व्यक्त किया संतोष
भंडारे की इस उच्च स्तरीय व्यवस्था और स्वच्छता की कहानी जब अभियान की टीम तक पहुँची, तो मंगलमान अभियान के केंद्रीय संयोजक प्रोफेसर रामकुमार तिवारी जी ने स्वयं आयोजन स्थल पर पहुँचकर ‘भंडारा दर्शन’ किया।
वहाँ की भव्यता, कीर्तन की पवित्रता और विशेषकर स्वच्छता के प्रति आयोजकों की प्रतिवद्धता को देखकर प्रोफेसर तिवारी अत्यंत गदगद हुए। उन्होंने आयोजक टीम की प्रशंसा करते हुए कहा, “अश्वंत वर्मा जी और उनकी युवा टीम ने यह साबित कर दिया है कि यदि युवाओं में इच्छाशक्ति हो, तो वे अपनी धार्मिक परंपराओं को पर्यावरण के अनुकूल बनाकर राष्ट्र मंगल के संकल्प को सच कर सकते हैं। आज के भंडारा आयोजकों की श्रेणी में इस आयोजन का स्थान बहुत ऊंचा है।”
📹 आयोजकों का संकल्प (वीडियो संदेश की मुख्य बातें)
आयोजन समिति के पदाधिकारियों और स्वयंसेवकों ने अभियान की टीम से बात करते हुए अपनी प्रसन्नता साझा की। उन्होंने बताया कि ‘मंगलमान अभियान’ के माध्यम से लखनऊ में जो स्वच्छता की अलख जगाई गई है, उससे प्रेरित होकर ही उन्होंने इस बार अपने भंडारे को पूरी तरह से ‘इको-फ्रेंडली’ और मर्यादित रखने का फैसला किया था। उन्होंने संकल्प लिया कि भविष्य में भी उनके द्वारा आयोजित होने वाले सभी धार्मिक एवं सामाजिक कार्यक्रम इसी प्रकार स्वच्छता की नई कहानियां लिखते रहेंगे।
इंदिरा नगर का यह भंडारा लखनऊ के उन सभी नागरिकों के लिए एक मार्गदर्शिका है जो बड़े मंगल पर भंडारा लगाने की इच्छा रखते हैं। जब सेवा में मर्यादा और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी शामिल होती है, तभी वह सच्चे अर्थों में ‘बड़ा मंगल’ कहलाती है। इस उत्कृष्ट और प्रेरणादायी प्रयास के लिए श्री अश्वंत वर्मा जी और उनकी पूरी टीम को मंगलमान परिवार की ओर से बहुत-बहुत साधुवाद!
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