📜 आस्था में अनुशासन और पर्यावरण का संकल्प: केशव नगर में संजय शुक्ला जी की प्रेरणा से ब्रह्मदेव मंदिर पर सजा ‘मंगलमान’ का आदर्श दरबार
“हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो, बड़ा मंगल से राष्ट्र मंगल हो”
लखनऊ। ज्येष्ठ मास के छठे बड़े मंगल (9 जून 2026) के पावन अवसर पर राजधानी के सीतापुर रोड स्थित केशव नगर क्षेत्र (उत्तर भाग) में आस्था, संस्कार और पर्यावरण चेतना का एक बेहद अद्भुत रूप देखने को मिला। यहाँ के प्रतिष्ठित श्री ब्रह्मदेव बाबा मंदिर परिसर में आयोजित हुए भव्य भंडारे ने न केवल श्रद्धालुओं को अपनी दिव्यता से सराबोर किया, बल्कि समूचे क्षेत्र के लिए स्वच्छता और सामाजिक समरसता का एक अनुकरणीय संदेश भी प्रसारित किया।
यह भंडारा मंगलमान अभियान के वरिष्ठ और अत्यंत समर्पित कार्यकर्ता श्रीमान संजय कुमार शुक्ला जी की पावन प्रेरणा और उनके साथ कदम से कदम मिलाकर चलने वाली एक ऊर्जावान टोली के सामूहिक पुरुषार्थ का परिणाम था।
🛠️ इंजीनियर ने संभाली कमान, युवाओं को मिले ‘सेवा और अनुशासन’ के संस्कार
इस भंडारे की सबसे खूबसूरत और खास बात इसके पीछे का युवा नेतृत्व रहा। पेशे से इंजीनियर श्री जितेन्द्र त्रिपाठी जी ने अपनी पूरी युवा टीम के साथ इस भंडारे की कमान संभाली।
संलग्न वीडियो में प्रबुद्ध आयोजकों ने बातचीत के दौरान एक बेहद गंभीर और सुंदर बात रेखांकित की। उन्होंने बताया कि इस प्रकार के भंडारे किसी ‘जाति विशेष’ या वर्ग के लिए नहीं होते। यहाँ समाज की हर जाति, हर वर्ग और हर आयु के लोग एक साथ मिलकर सेवा में हाथ बंटाते हैं और एक साथ बैठकर प्रसाद पाते हैं।
सबसे बड़ी बात यह है कि भंडारे के माध्यम से हमारी नई पीढ़ी और नन्हे बच्चों में ‘सेवा और अनुशासन’ के गहरे संस्कार स्वतः ही रोपित हो रहे हैं, जो हमारी सनातनी परंपरा की सबसे बड़ी ताकत है।
📙 सुंदरकांड की गूंज और पूर्णतः ‘कागज-पत्तल’ आधारित हरित भंडारा
ब्रह्मदेव मंदिर में बड़े मंगल के इस पावन उत्सव की शुरुआत सुबह 10:00 बजे प्रभु हनुमान जी महाराज के चरणों में अगाध श्रद्धा के साथ ‘सुंदरकांड पाठ’ के गायन से हुई। इसके उपरांत, दोपहर 12:00 बजे से प्रभु इच्छा और देर रात्रि तक महा-प्रसाद का वितरण अनवरत चलता रहा।
भीषण गर्मी को देखते हुए आयोजकों ने श्रद्धालुओं की तृप्ति के लिए ठंडे-मीठे शरबत और बजरंगबली के प्रिय महा-प्रसाद ‘बूंदी’ (बुंदिया) का वितरण किया। इस संपूर्ण आयोजन में मंगलमान के मार्गदंडों का कड़ाई से पालन किया गया:
- प्लास्टिक और थर्माकोल पर पूर्ण विराम: भंडारे में प्लास्टिक के गिलासों या थर्माकोल के दोनों को पूरी तरह वर्जित रखा गया था। इसके स्थान पर केवल शत-प्रतिशत पर्यावरण-अनुकूल कागज के गिलासों और पत्तलों का उपयोग किया गया।
- सजग कचरा प्रबंधन: आयोजन स्थल के ठीक सामने राहगीरों और श्रद्धालुओं के लिए हरे रंग के बड़े डस्टबिन (कूड़ेदान) स्थापित किए गए थे। स्वयंसेवक लगातार सभी से अपनी प्रयुक्त सामग्रियां डस्टबिन में ही डालने का विनम्र आग्रह कर रहे थे, जिससे मंदिर की मुख्य सड़क पर किंचित मात्र भी गंदगी नहीं फैली।
🤝 संजय शुक्ला, सुधीर पांडे और इंद्रेश शुक्ला की टोली जगा रही है महा-जागृति
कहते हैं कि एक अकेला दीया भी पूरे अंधकार को चुनौती देने का साहस रखता है। मंगलमान अभियान के केंद्रीय आग्रह—“कि भंडारे सुंदर हों, स्वच्छ हों और पूरी तरह भाव से सजे हों”—को लेकर संजय शुक्ला जी, सुधीर पांडे जी और इंद्रेश शुक्ला जी जैसे कर्मठ सिपाहियों ने जो अलख जगाई है, उसका व्यापक असर अब धरातल पर दिखने लगा है।
उनके इस भगीरथ प्रयास के कारण आज केवल केशव नगर ही नहीं, बल्कि आसपास के दर्जनों भंडारे स्वतः प्रेरणा से मंगलमान के पर्यावरण-अनुकूल मॉडलों को अपनाने लगे हैं। यह आयोजन इस बात का जीवंत प्रमाण है कि समाज को सही दिशा दिखाई जाए, तो लोग बड़े से बड़े बदलाव के लिए सहर्ष तैयार हो जाते हैं।
🌸 इस पुनीत कार्य में सहभागी बने प्रमुख बंधु
इस महा-आयोजन को अपनी सेवा और समर्पण से सफल बनाने में क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों ने बढ़-चढ़कर प्रतिभाग किया। मुख्य रूप से:
- श्री जितेन्द्र त्रिपाठी जी (संयोजक एवं युवा इंजीनियर)
- श्री उमाशंकर त्रिपाठी जी * पुजारी श्री बलराम तिवारी जी (प्रधान पुजारी, ब्रह्मदेव मंदिर)
- श्री छोटेलाल जी
- श्री गोविन्द कृष्ण जी
- श्री संजय कुमार शुक्ला जी (वरिष्ठ कार्यकर्ता, मंगलमान)
- श्री सुधीर पाण्डेय जी एवं श्री श्यामू पाण्डेय जी
- श्री अमरनाथ जी सहित क्षेत्र के अन्यान्य सहयोगी बंधुओं ने पूरी तन्मयता से श्रद्धालुओं की सेवा की।
ब्रह्मदेव मंदिर, केशव नगर का यह पावन भंडारा लखनऊ के उन शीर्ष श्रेष्ठ आयोजनों में सम्मान के साथ दर्ज हुआ है, जहाँ इस बड़े मंगल पर स्वच्छता और मर्यादा की एक नई व अनूठी कहानी लिखी गई है। इस अत्यंत सुंदर, अनुशासित और पवित्र प्रयास के लिए श्री संजय शुक्ला जी, जितेन्द्र त्रिपाठी जी और उनकी संपूर्ण मित्र-मंडली को मंगलमान परिवार की ओर से कोटि-कोटि बधाई और अनंत साधुवाद!
क्या आपके क्षेत्र में भी बड़े मंगल पर युवाओं ने इस तरह कमान संभाली थी? अपने अनुभव और विचार हमसे कमेंट बॉक्स में अवश्य साझा करें और इस समरसता व स्वच्छता के संदेश को जन-जन तक पहुँचाने के लिए इस लेख को शेयर करें!
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