लखनऊ की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान ‘बड़ा मंगल’ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सेवा और समरसता का एक विशाल उत्सव है। इस उत्सव की भव्यता को बनाए रखने और पर्यावरण को संरक्षित करने के उद्देश्य से हाल ही में मंगलमान द्वारा एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक आयोजित की गई।
इस बैठक के मुख्य वक्ता श्री गोपाल आर्य जी (अखिल भारतीय पर्यावरण संरक्षण गतिविधि संयोजक, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) रहे, जिन्होंने “बड़ा मंगल: शून्य अपशिष्ट और हरित भंडारा” विषय पर मार्गदर्शन दिया।
चर्चा के मुख्य बिंदु: पर्यावरण संरक्षण में हमारी भूमिका
श्री गोपाल आर्य जी ने समाज के विभिन्न स्तरों पर कार्य करने का आह्वान किया, जिससे इस बार का बड़ा मंगल एक मिसाल बन सके:
1. शून्य अपशिष्ट (Zero Waste) और हरित भंडारा
बैठक का मुख्य केंद्र यह था कि भक्ति और स्वच्छता एक-दूसरे के पूरक होने चाहिए। हरित भंडारा वह है जहाँ:
- प्लास्टिक और थर्माकोल का उपयोग पूरी तरह वर्जित हो।
- भोजन के लिए पत्तल, दोने या स्टील के बर्तनों का उपयोग किया जाए।
- कचरे का प्रबंधन आयोजन स्थल पर ही इस प्रकार हो कि सड़क पर गंदगी न फैले।
2. ‘बर्तन बैंक’ – एक क्रांतिकारी समाधान
श्री गोपाल आर्य जी ने पंजाब के सफल उदाहरणों का जिक्र करते हुए लखनऊ में भी बर्तन बैंक को बढ़ावा देने पर जोर दिया। स्टील के गिलास और प्लेटों का उपयोग न केवल कचरा कम करता है, बल्कि यह हमारी अर्थव्यवस्था और पर्यावरण दोनों के लिए दीर्घकालिक लाभ प्रदान करता है।
3. जन-भागीदारी (Public Movement) के तीन स्तर
उन्होंने इस अभियान को सफल बनाने के लिए तीन स्तरों पर प्रयास करने का सुझाव दिया:
- व्यक्तिगत (Personal): हर नागरिक स्वयं गंदगी न करने का संकल्प ले।
- व्यावसायिक (Professional): व्यापारी मंडल, स्कूल और संस्थाएं अपनी-अपनी जिम्मेदारी समझें।
- सामाजिक (Public): इसे एक जन-आंदोलन बनाया जाए जहाँ समाज के सभी वर्ग एक साथ आएं।
4. तकनीक और युवा शक्ति का उपयोग
बैठक में युवाओं की भूमिका पर विशेष चर्चा हुई। मंगलमान इंटर्नशिप प्रोग्राम (MIP) के माध्यम से ‘मंगल सेवक’ तकनीकी सहायता (जैसे AI और वेब ऐप) का उपयोग करके भंडारा आयोजकों का मार्गदर्शन करेंगे।
मंगलमान का संकल्प: “हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो, और बड़े मंगल से राष्ट्र मंगल हो।”

बड़ा मंगल 2026: एक स्वर्णिम अवसर
वर्ष 2026 में 8 बड़े मंगल का होना हमारे लिए सेवा का एक बड़ा अवसर है। मंगलमान और पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के संयुक्त प्रयासों से हम इस वर्ष लखनऊ को ‘शून्य अपशिष्ट उत्सव’ का वैश्विक मॉडल बनाने की ओर अग्रसर हैं।
आप कैसे योगदान दे सकते हैं?
- हरित संकल्प लें: अपने भंडारे में केवल प्राकृतिक और पुनर्चक्रण योग्य (Recyclable) सामग्रियों का उपयोग करें।
- पंजीकरण: अपने भंडारे का विवरण वेबसाइट पर दर्ज करें ताकि नगर निगम और मंगलमान की टीम समन्वय कर सके।
- बर्तन बैंक से जुड़ें: अपने क्षेत्र में बर्तन बैंक की शुरुआत करें या उसमें सहयोग दें।
आइए, हम सब मिलकर लखनऊ की इस पावन परंपरा को प्रकृति के अनुकूल बनाकर ‘राष्ट्र मंगल’ की दिशा में कदम बढ़ाएं।
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