1.पहला लाभ—–: मंदिर जाना इसलिए जरूरी है कि वहां जाकर आप यह सिद्ध करते हैं कि आप देव शक्तियों में विश्वास रखते हैं तो देव शक्तियां भी आपमें विश्वास रखेंगी। यदि आप नहीं जाते हैं तो आप कैसे व्यक्त करेंगे की आप परमेश्वर या देवताओं की तरफ है.? यदि आप देवताओं की ओर देखेंगे तो देवता भी आपकी ओर देखेंगे। और यह भाव मंदिर में देवताओं के समक्ष जाने से ही आते हैं। 2.दूसरा लाभ—–: अच्छे मनोभाव से जाने वाले की सभी तरह की समस्याएं प्रतिदिन मंदिर जाने से समाप्त हो जाती है। मंदिर जाते रहने से मन में दृढ़ Read More
सद्भाव ~ समाज मे~~~~क्या इतना बड़ा विषय है कि ❓❓सद्भाव किससे ❓❓विद्वानों का मत है कि न्याय करने से अधिक न्याय होते दिखना चाहिए ??सद्भाव किनके बीच पहली प्राथमिकता ❓❓❓सद्भाव के आवश्यक तत्व ❓ भारतीय समाज में अनेक आभासी विरोधाभास भी विविधतायें भी।क्या ये सद्भाव केवल विभिन्न पंथो के मध्य या हमारे समाज मे स्वतः स्फुटित जातियो के मध्य। हमको प्राथमिकता तय करना होगा। या सभी के बीच।तो पहल कहां से ❓❓राष्ट्रीय आवश्यकता तो अनुभव मे आता है, कि राष्ट्र तो समविचार , समसांस्कृतिक व समव्यावहार से निर्मित भूभाग होता है तो पुनः वही प्रश्न , कि हमारी प्राथमिकता ? Read More
मैं सक्षम हूं , मैं योग्य हूं ,मैं अवश्य सफल हूंगा , मैं जीतूंगा । मेरे असफल होने से मेरे परिवार , समाज व ईष्ट मित्रों का भी सम्मान घटेगा। इस प्रकार के भाव हमे निरन्तर आत्म शक्तिसंपन्न करते है। *जो होता है होने दो, यह पौरुष हीन कथन है**जो हम चाहेंगे वह होगा, इसमे ही जीवन है* ??*संकल्प*~~~~~ ● आत्म रक्षा > आत्म गौरव ● ● राष्ट्र रक्षा > राष्ट्र गौरव ● *आत्म रक्षा के आवश्यक तत्व*~~~~~~~~~~~~~~~~~आत्मावलोकन ।आत्म चितंन ।आत्म विश्वास । *आत्मावलोकन* — स्वयं की पहचान करना, स्वयं का मूल्यांकन करना, लक्ष्य निर्धारित करना, बाधक तत्वो [ कमियो Read More
क्या आप जानते हैं कि…. धनतेरस का महापर्व क्या है… और, ये क्यों मनाया जाता है ???22 और 23 अक्टूबर को धनतेरस मनाया जाएगा किंतु 22 अक्टूबर को प्रदोष काल में धनतेरस की पूजा ज्यादा ठीक होगी, जो लोग उदया तिथि के अनुसार मानते हैं वह 23 अक्टूबर को धनतेरस मना सकते हैं।अधिकतर लोग इसे धन की पूजा मानते हैं …तथा, इस दिन महंगे धातु खरीदते हैं… क्योंकि, हमने बचपन से ही अपने घर के लोगों को ऐसा करते देखते आए हैं …और, इसे दीपावली के एक भाग के तौर पर मनाते हैं. जबकि, सच्चाई थोड़ी भिन्न है… और, “धनतेरस” Read More