ए. पी. सेन मेमोरियल गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग ने मंगलमान के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल का आयोजन किया। यह सहयोग कॉलेज और मंगलमान के बीच हुए एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) का एक सक्रिय भाग है। “पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास” अभियान के तहत आयोजित इस व्यापक कार्यक्रम में दिवाली के बाद ई-विसर्जन के माध्यम से मूर्तियों का सम्मानजनक विसर्जन और अवशिष्ट फूलों से धूपबत्ती निर्माण जैसे रचनात्मक आयाम शामिल थे। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. अलका मिश्रा एवं कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव द्वारा संयुक्त रूप Read More
नगर आयुक्त ने किया ‘मंगलमान ऐप’ का वेब वर्जन लॉन्च
आप अपनी परंपरा पर गर्व करते है और इसके समन्यवय, संवर्द्धन एवं समुत्कर्ष (ग्लोब्लाइजेशन) में सहयोग करना चाहते है तो आपका हार्दिक अभिनन्दन है। निम्न फॉर्म के माध्यम से पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराने का कष्ट करे। Loading…
ई-भंडारे का आयोजन अत्यंत ही सरल है जिसे आप आसानी से कर सकते है। ई-भंडारा के माध्यम से कम श्रम, शक्ति, संसाधन लगाकर अत्यधिक पर्यावरण केंद्रित, सामाजिक सरोकार से युक्त, प्रभावी भंडारे का आयोजन किया जा सकता है। इसके बारे में आपके मन मष्तिष्क में उठाने वाले प्रश्नो के उत्तर देने का यहां यथोचित प्रयास किया गया है। ई-भण्डारा क्या है? ई-भंडारा परंपरागत रूप से लगाए जाने वाले भण्डारो का संवर्धित स्वरुप है। यहां ई-भंडारा का अर्थ है- Easy, Economic, Environmental friendly, Electronically empowered, Effective Bhandara . ई-भण्डारा सेवा क्या है? भंडारा लगाने के इच्छुक व्यक्तियों, समूहों एवं संस्थाओ को ई- भण्डारा Read More
कोरोना महामारी के कारण उत्पन्न हुई विशेष परिस्थितियों के चलते २०२० के ज्येष्ठ के मंगलो (बड़ा मंगल) का महत्व और भी अधिक बढ़ जाता है। आज की आवश्यकता हर मंगल को बड़ा मंगल और हर दिन को मंगल करने की है। परन्तु लॉकडाउन एवं सोशल डिस्टैन्सिंग के दिशा-निर्देशों के परिपेक्ष्य में परंपरागत स्वरुप में भंडारों का आयोजन अत्यंत ही दुरूह कार्य है।
ई-भंडारा परंपरागत रूप से लगाए जाने वाले भण्डारो का संवर्धित स्वरुप है। इसके माध्यम से कम श्रम, शक्ति, संसाधन लगाकर अत्यधिक पर्यावरण केंद्रित, सामाजिक सरोकार से युक्त, प्रभावी भंडारे का आयोजन किया जा सकता है। लखनऊ की श्रेष्ठ परम्पराओ में से एक पावन परंपरा है- ग्रीष्म काल अर्थात ज्येष्ठ के महीने में पड़ने वाले मंगल को लगने वाले भंडारे। जिसमे मानव ही क्या पशु पक्षी सभी की आत्मा को तृप्त करने का सामर्थ्य है। लखनऊ वासी इस अवसर पर भंडारा आयोजित करके प्राणी मात्र की सेवा का अवसर पाते है और भगवन हनूमान की कृपा के पात्र बनते है। वर्तमान कोरोना Read More