भारत की समृद्धि का आधार: गौ-संस्कृति

लखनऊ, भागीरथी एन्क्लेव: हाल ही में मंगलमान अभियान से जुड़े कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय गौ सेवा प्रमुख, श्रीमान नवल किशोर जी ने भारत के गौरवशाली अतीत और वर्तमान चुनौतियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत को ‘सोने की चिड़िया’ बनाने में हमारी गौ-आधारित व्यवस्था की केंद्रीय भूमिका रही है।

इतिहास के पन्नों से: दूध-दही की नदियां

श्री नवल किशोर जी ने बताया कि चीनी यात्री ह्वेन सांग और फाहियान के वृत्तांतों में भारत को एक अत्यंत समृद्ध राष्ट्र बताया गया है。 उस समय अतिथि को पानी के स्थान पर गाय का दूध दिया जाता था, जिसे विदेशी यात्रियों ने ‘दूध-दही की नदियां बहना’ कहकर संबोधित किया। यह समृद्धि किसी कारखाने से नहीं, बल्कि घर-घर में मौजूद गौ-धन से आई थी।

षड्यंत्र और गिरावट का दौर

उद्बोधन के दौरान उन्होंने सतर्क किया कि कैसे लॉर्ड मैकाले और ब्रिटिश नीतियों ने भारत की रीढ़ यानी ‘गौ-संस्कृति’ को तोड़ने का प्रयास किया।

  • सांस्कृतिक प्रहार: शिक्षा पद्धति बदलकर भारतीयों को अपनी परंपराओं से दूर किया गया।
  • आर्थिक चोट: गौचर भूमियों (चरागाहों) पर कब्जा कर गौ-वंश को बेसहारा किया गया।
  • विनाशकारी खेती: रासायनिक खाद और कीटनाशकों के प्रयोग ने आज हमारी धरती को बंजर और किसान को कर्जदार बना दिया है।

नंदिनी से नए भारत तक: समाधान की राह

ऋषि वशिष्ठ की गाय ‘नंदिनी’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि गाय केवल पशु नहीं, बल्कि समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली शक्ति है। आज के संकटपूर्ण समय में उन्होंने कार्यकर्ताओं को ‘गौ-व्रती परिवार’ बनने का आह्वान किया।

मंगलमान कार्यकर्ताओं के लिए आह्वान (Action Points):

  1. शुद्ध आहार का चयन: अपने भोजन में केवल देसी गाय के दूध और घी का स्थान सुनिश्चित करें।
  2. जहर मुक्त खेती को बढ़ावा: रसायनों को त्यागकर पंचगव्य आधारित प्राकृतिक खेती का समर्थन करें।
  3. गौ-पालकों का संबल: सीधे गौशालाओं से जुड़कर उन्हें आर्थिक रूप से सुदृढ़ बनाएं।
  4. गोमय उत्पादों का प्रयोग: पूजा और दैनिक जीवन में गोबर से बने उत्पादों (दीपक, अगरबत्ती) को प्राथमिकता दें।

निष्कर्ष: श्री नवल किशोर जी का यह संबोधन हमें याद दिलाता है कि “हर दिन मंगल” तभी संभव है जब हम अपनी जड़ों की ओर लौटें। मंगलमान अभियान के माध्यम से हम समाज में पुनः उसी ‘गौ-आधारित’ स्वावलंबी व्यवस्था को स्थापित करने का संकल्प लेते हैं।

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