लखनऊ, 26 मार्च 2026: लखनऊ की ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक धरोहर ‘बड़ा मंगल’ को इस वर्ष एक नई ऊँचाई प्रदान करने के लिए ‘मंगलमान अभियान’ द्वारा विशेष बैठकों का आयोजन किया गया। इन बैठकों का केंद्र बिंदु राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय पर्यावरण गतिविधि संयोजक, श्रीमान गोपाल आर्य जी का गरिमामयी मार्गदर्शन रहा। उन्होंने मंगलमान के प्रयासों की सराहना करते हुए आह्वान किया कि इस वर्ष ‘बड़ा मंगल’ को केवल भव्यता और दिव्यता तक सीमित न रखकर, इसे ‘स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण’ का एक वैश्विक मॉडल बनाया जाए।
श्री आर्य ने ‘अवेयरनेस, पार्टिसिपेशन और मूवमेंट’ का त्रिसूत्रीय मंत्र देते हुए कहा कि श्रद्धा और गंदगी एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने विशेष रूप से ‘बर्तन बैंक’ की अवधारणा और ‘एक थैला, एक थाली’ अभियान पर जोर दिया, ताकि भंडारों में सिंगल-यूज़ प्लास्टिक को पूरी तरह समाप्त किया जा सके।
इस अवसर पर 2 मई 2026 को आयोजित होने वाले ‘मंगल महोत्सव’ के पोस्टर का विमोचन भी किया गया। अभियान के तहत एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड के युवा स्वयंसेवक प्रत्येक भंडारा स्थल पर ‘स्वच्छता दूत’ के रूप में तैनात रहेंगे। बैठक का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि 2026 का बड़ा मंगल पर्यावरण संरक्षण की एक नई मिसाल पेश करेगा।
श्री गोपाल आर्य जी का मार्गदर्शन
श्री आर्य जी ने अपने उद्बोधन में स्पष्ट किया कि बड़ा मंगल केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि एक सामाजिक महापर्व है। इसकी सार्थकता तभी है जब हम श्रद्धा के साथ-साथ प्रकृति के प्रति अपने उत्तरदायित्वों का निर्वहन करें। उनके मार्गदर्शन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
- दिव्यता और स्वच्छता का अटूट संबंध: श्रद्धा और गंदगी एक साथ नहीं रह सकते। यदि हम हनुमान जी की सेवा करना चाहते हैं, तो आयोजन स्थल को ‘कचरा मुक्त’ रखना अनिवार्य है।
- एकल-उपयोग प्लास्टिक का त्याग: भंडारा आयोजकों से अपील की गई कि वे सिंगल-यूज प्लास्टिक और पॉलीथिन का पूर्णतः बहिष्कार करें।
- सामूहिक नागरिक कर्तव्य: बड़ा मंगल का प्रबंधन केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह हर लखनऊवासी और मंगलमान कार्यकर्ता का निजी संकल्प होना चाहिए।

त्रिसूत्रीय मंत्र: ‘अवेयरनेस, पार्टिसिपेशन और मूवमेंट’
किसी भी सामाजिक परिवर्तन को धरातल पर उतारने के लिए श्री आर्य जी ने एक प्रभावी कार्ययोजना (Framework) प्रस्तुत की:
- जन-जागरूकता (Public Awareness): श्रद्धालुओं को यह बोध कराना कि “डालो तो डस्टबिन में”। भक्तों से संकल्प लेना कि वे भंडारों में पॉलीथिन लेकर न जाएँ और यदि ले जाएँ, तो उसे सड़कों पर कतई न फेंकें।
- जन-सहभागिता (Public Participation): इस अभियान में समाज के हर वर्ग को जोड़ना। विशेषकर शिक्षण संस्थानों (स्कूल-कॉलेज), एनजीओ, एनसीसी (NCC), एनएसएस (NSS) और स्काउट-गाइड के युवाओं को सक्रिय भूमिका में लाना।
- जन-आंदोलन (Public Movement): जब जागरूकता और सहभागिता का मेल होगा, तभी यह अभियान एक ‘जन-आंदोलन’ बनेगा। लक्ष्य यह है कि ‘जीरो वेस्ट’ (Zero Waste) का संकल्प हर नागरिक का अपना उद्देश्य बन जाए।
रणनीतिक पहल और व्यावहारिक समाधान
बैठक के दौरान आगामी ‘बड़ा मंगल’ के लिए कुछ महत्वपूर्ण रणनीतिक निर्णय लिए गए, जो इस उत्सव को पर्यावरण-अनुकूल बनाएंगे:
| पहल | विवरण |
| बर्तन बैंक (बर्तन Bank) | डिस्पोजेबल बर्तनों के स्थान पर स्टील की थालियों और गिलासों के उपयोग को बढ़ावा देना। आयोजक यहाँ से बर्तन प्राप्त कर सकेंगे। |
| ‘एक थैला, एक थाली’ | हर घर से कम से कम एक थैला और एक थाली अभियान से जोड़ना ताकि आत्मनिर्भर स्वच्छता मॉडल विकसित हो। |
| युवा ब्रांड एंबेसडर | छात्रों को स्वच्छता का संदेशवाहक बनाना, जो अपने परिवार और समाज को प्रेरित करेंगे। अभियान के तहत एनसीसी, एनएसएस और स्काउट-गाइड के युवा स्वयंसेवक प्रत्येक भंडारा स्थल पर ‘स्वच्छता दूत’ के रूप में तैनात रहेंगे। |
| सेल्फी पॉइंट | युवाओं को आकर्षित करने के लिए “स्वच्छ और हरित बड़ा मंगल” थीम पर आधारित डिजिटल प्रचार। |
| आयोजक प्रशिक्षण | लखनऊ के प्रमुख भंडारा आयोजकों को ‘कचरा मुक्त भंडारा’ आयोजित करने हेतु तकनीकी और व्यावहारिक प्रशिक्षण देना। |
आगामी कार्यक्रम: मंगल महोत्सव
अभियान को गति देने के लिए श्री गोपाल आर्य जी ने 2 मई, 2026 को आयोजित होने वाले ‘मंगल महोत्सव’ के पोस्टर का विमोचन किया। 5 मई को पड़ने वाले पहले बड़े मंगल से ठीक पहले यह महोत्सव एक ‘शंखनाद’ की तरह होगा। इसका उद्देश्य उत्सव की शुरुआत से पहले ही पूरे शहर में स्वच्छता, पवित्रता और हनुमान जी की कृपा के संदेश को जन-जन तक पहुँचाना है।
राष्ट्र मंगल का संकल्प
श्री गोपाल आर्य जी के पाथेय ने मंगलमान के कार्यकर्ताओं में एक नई ऊर्जा और दिशा का संचार किया है। स्वच्छता को हनुमान जी के आशीर्वाद और सेवा भाव से जोड़कर एक भावनात्मक और आध्यात्मिक वातावरण तैयार किया गया है।
बैठक का समापन “सर्वे भवन्तु सुखिनः” के मंगल पाठ के साथ हुआ। मंगलमान अभियान अब इस विश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है कि वर्ष 2026 का ‘बड़ा मंगल’ न केवल भक्ति का प्रतीक होगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए पर्यावरण संरक्षण की एक अमर मिसाल बनेगा।
“हर दिन मंगल हो, हर मंगल बड़ा मंगल हो, बड़ा मंगल से राष्ट्र मंगल हो”
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