ए.पी. सेन कॉलेज: पूजन सामग्री से पर्यावरण संरक्षण संदेश


ए. पी. सेन मेमोरियल गर्ल्स पी.जी. कॉलेज के समाजशास्त्र विभाग ने मंगलमान के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण की एक अनूठी पहल का आयोजन किया। यह सहयोग कॉलेज और मंगलमान के बीच हुए एक एमओयू (समझौता ज्ञापन) का एक सक्रिय भाग है। “पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास” अभियान के तहत आयोजित इस व्यापक कार्यक्रम में दिवाली के बाद ई-विसर्जन के माध्यम से मूर्तियों का सम्मानजनक विसर्जन और अवशिष्ट फूलों से धूपबत्ती निर्माण जैसे रचनात्मक आयाम शामिल थे।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रख्यात पर्यावरणविद् डॉ. अलका मिश्रा एवं कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया।

इस अवसर पर कॉलेज की छात्राओं, शिक्षकों और कर्मचारियों ने एकत्रित करके लाई गई गणेश-लक्ष्मी की सैकड़ों मूर्तियों को मंगलमान की टीम को सौंपा। मंगलमान द्वारा अपनी ई-विसर्जन पद्धति से इन मूर्तियों का पर्यावरण-हितैषी, वैज्ञानिक तरीके से सम्मानजनक विसर्जन सुनिश्चित किया गया। मंगलमान के प्रतिनिधि, श्री नवल पांडे ने इस प्रक्रिया की तकनीकी जानकारी देते हुए बताया कि इससे जल स्रोतों के प्रदूषण को रोकने में सीधी मदद मिलती है।

कार्यक्रम का एक अन्य महत्वपूर्ण एवं व्यावहारिक सत्र विभाग के इंटर्नशिप प्रोग्राम के तहत आयोजित किया गया, जहाँ छात्राओं को घरों में पूजा-पाठ के बाद निकलने वाले बेकार फूलों को सुखाकर सुगंधित तथा प्राकृतिक धूपबत्तियाँ बनाने का हस्त-प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण का संचालन डॉ. मनीषा कुमारी और डॉ. कीर्ति गौड़ ने किया। इससे न केवल कार्बनिक कचरे का सदुपयोग हुआ, बल्कि छात्राओं को एक हरित उद्यमिता (Green Entrepreneurship) का कौशल भी प्राप्त हुआ।

इसके अलावा, छात्राओं ने रचनात्मकता का परिचय देते हुए घास और नारियल की जटा से सुंदर एवं उपयोगी चिड़ियों के घर (बर्ड हाउस) भी तैयार किए, जिन्हें परिसर के वृक्षों पर लगाया गया।

कॉलेज की प्राचार्या प्रोफेसर रचना श्रीवास्तव ने मंगलमान के सहयोग और समाजशास्त्र विभाग के निरंतर प्रयासों की सराहना करते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य केवल शिक्षा देना नहीं, बल्कि सामाजिक सरोकारों से जुड़े जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है। यह कार्यक्रम उसी दिशा में एक सार्थक कदम है।”

उन्होंने संबोधन में कहा, “यह पहल इस बात का जीवंत उदाहरण है कि छोटे-छोटे सामूहिक प्रयास पर्यावरण संरक्षण की दिशा में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। कॉलेज और मंगलमान का यह सहयोगी मॉडल अन्य शैक्षणिक संस्थानों के लिए भी प्रेरणादायी है।”

विभाग की प्रभारी प्रोफेसर श्वेता तिवारी के कुशल मार्गदर्शन में यह कार्यक्रम संचालित हुआ। उन्होंने बताया कि लगभग 6 वर्षों से चल रहे इस दीर्घकालिक अभियान के तहत “कैरी द चेंज”, “सेव ग्रीन एनर्जी” जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 200 छात्राओं को प्रशिक्षित किया जाता है।

इस कार्यक्रम में प्रो. उषा पाठक, प्रो. रश्मि श्रीवास्तव, डॉ. ऋचा मुक्ता, डॉ. मोनिका अवस्थी, डॉ. दीपशिखा, डॉ. वैशाली, श्रीमती कंचन मिश्रा सहित विभाग के समस्त शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्राएं उपस्थित रहीं। इस सफल आयोजन ने न केवल छात्राओं में पर्यावरण चेतना का संचार किया, बल्कि कॉलेज और मंगलमान के बीच एमओयू के तहत सतत विकास के एक ठोस और प्रभावशाली मॉडल को भी रेखांकित किया।

Leave a Comment